Friday, September 4, 2015

तख्तियाँ

वो एहसान भूल के गिन रहे है फब्तियां..
दोस्ती की कब्र पे जड़ रहे है तख्तियाँ

Tuesday, May 5, 2015

दूपहरिया का फूल ..

दूपहरिया का फूल ..
और चटकती धूप में उठते
मन में धूल के बवंडर ..
आज पता लग गया की
गेहू कनक नही होता ..
और न किसान भगत सिंह
मेरी लटकती रस्सी के स्टीकर
लगे कपो में कॉफ़ी पी के वो
करते रहेगे महसूस
क्रांतिकारी.. बहुत क्रांतिकारी ..
#AakashPandeyFB