Saturday, August 20, 2016

खेत क्या होता है ? , पूछेगे लोग

खेत क्या होता है ? , पूछेगे लोग
किसान तो एक सॉस का नाम है हम जानते है ।
मिल्क पैकेट से आता है , ये भी पता है
और गेहूँ ? बाली ?
बाली आइ नो ।। वो जो कान में पहनते है ।
खेत क्या होता है ? , पूछेगे आज़ाद लोग

- आकाश पांडेय , आज़ाद भारत , मुंबई २१ अगस्त , सन २०१६

Friday, August 19, 2016

सौधा सौधा सा था

बचपन में आँगन का अँधेरा भी
सौधा सौधा सा था ।
वो खुशनुमा सा था ,
उसमें थी , कहानियाँ ।
मिट्टी के तेल की कुप्पी से आती
लौ से निकला काजल ।
जुगनू , बारिश की आवाज़ ,
और सुबह के सूरज की उम्मीद ।

ये अँधेरा बड़ा अजनबी सा लगता है ,
बहुत रौशनी है इसमें ।
शायद मोतियाबिंद में माँ को
ऐसा ही लगता होगा ।
बचपन में आँगन का अँधेरा भी
सौधा सौधा सा था ।



- आकाश पांडेय , मुम्बई २० अगस्त , २०१६

Saturday, May 7, 2016

बोतलें

काट के जंगल बनाया है शहर हमने
अब बोतलों में यहाँ जंगल को तरसते हैं
सुखा के पानी हम बने आका से फिरते है
सब बोतलों में चुल्लू बना के डूबते है रोज़
- आकाश पाण्डेय
8 मई 2016

Sunday, May 1, 2016

शाम

बेलफ्ज़ हो गए हम उस शाम को ,
अब तरसेगे हर शाम उस नाम को ।
वो रास्ते तो बेफ़िक्र से लगते थे हमे
वो अँधेरे से लगते है मुझ गुमनाम को।

Wednesday, December 9, 2015

अहमक

अब उन गलियों में जाता नहीं
जहाँ कागज़ की कश्ती बहाता था मैं
छोटू से सयाना बन के मैं अहमक
कागज़  में खुद को गवांता हूँ मैं
- आकाश पाण्डेय

Thursday, October 29, 2015

फसल

तेरे ख्वाबो में ना जाने कब सुबह हो गई..
रातें भर तेरे नाम की फसल है बोई.
उगाता हूँ तेरा नाम , बोता भी हूँ .
सीचता हूँ जिगर से .. पर काटता है कोई ..

Monday, October 19, 2015

जी नहीं हम सनसनी से है



भारत की आजादी की पहली लड़ाई 
अर्थात् १८५७ के विद्रोह की शुरुआत 
मंगल पाण्डेय से हुई जब 
गाय व सुअर कि चर्बी लगे कारतूस लेने से 
मना करने पर उन्होंने विरोध जताया..  
सभी चैनल उनके पास पहुच गए.. 
पाण्डेय जी आप सेकुलर है या .. कम्युनल ?  
पाण्डेय जी सोच में पड गए ? 
बोले मैं वतन के बेटा हूँ ? 
चैनल ; वो किस पार्टी में थे ? 
पाण्डेय जी मुस्कुराए बोले :  आप CNN से है क्या ?  
चैनल बोले जी नहीं हम सनसनी से है .
© आकाश पाण्डेय