अफ़साने कुछ अनजाने, और गीत पुराने लाया हूँ.... आज तुम्हारी बातों से मैं लफ़्ज़ चुराने आया हूँ.
Thursday, May 6, 2010
आज शंकर ने देखा(शिवरात्रि पर)
आज शंकर ने देखा, इंसा को विष फैलाते हिन्द में....
नीलकंठ सोचते है कि , क्यों है आदम ऐसा ...
जिसकी खातिर पिया था उन्होने प्याला कसैला....
वो खुद ही बना है, अपनी आस्तीन का संपोला..
February 12 at 10:14pm
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